• Wed. Jul 22nd, 2026

Network10 Live

Uttarakhand News Portal

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में कैंसर के बढ़ते मामलों पर रिसर्च करेगा श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, भविष्य की नीति बनाने में मिलेगी मददप

Share this

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में कैंसर के बढ़ते मामलों पर रिसर्च करेगा श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, भविष्य की नीति बनाने में मिलेगी मदद


उत्तराखण्ड के विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों से भोजन नली अर्थात् इसोफेगस के कैंसर से पीड़ित मरीज उपचार के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग में पहुंच रहे हैं। इन मरीजों में दिखाई दे रहे रुझानों को वैज्ञानिक रूप से समझने के लिए श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग ने इस विषय पर व्यापक शोध शुरू करने का निर्णय लिया है।

इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह जानना होगा कि पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाले मरीजों में भोजन नली के कैंसर के पीछे तम्बाकू, धूम्रपान, शराब का सेवन, अत्यधिक गर्म चाय, भोजन या अन्य पेय पदार्थों का नियमित सेवन, फल एवं सब्जियों की कमी, पोषण संबंधी असंतुलन, मोटापा, एसिड रिफ्लक्स, घरों के भीतर धुएं का संपर्क, पेयजल की गुणवत्ता, पर्यावरणीय परिस्थितियां तथा अन्य स्थानीय कारणों की क्या भूमिका है। किसी एक कारण को जिम्मेदार मानने के बजाय सभी संभावित जोखिम कारकों का व्यवस्थित एवं प्रमाण-आधारित अध्ययन किया जाएगा।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कैंसर सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. पंकज कुमार गर्ग ने बताया कि अस्पताल में उत्तराखण्ड के विभिन्न पहाड़ी जिलों से भोजन नली के कैंसर के अनेक मरीज उपचार के लिए आते हैं। अब तक कई मरीजों का सर्जरी, कीमोथेरेपी तथा अन्य आधुनिक उपचार विधियों से सफलतापूर्वक उपचार किया जा चुका है। अस्पताल में उपचार प्राप्त कर चुके कई मरीज पांच वर्ष से अधिक समय से जीवित हैं और सामान्य एवं स्वस्थ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में भोजन नली के कैंसर की जांच और उपचार के लिए अपर जीआई एंडोस्कोपी, बायोप्सी, पैथोलॉजी, सीटी स्कैन तथा अन्य आवश्यक जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन जांचों के आधार पर बीमारी की अवस्था, मरीज के सामान्य स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति का आकलन कर व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर विशेष जांचों अथवा उपचार के लिए संबंधित विशेषज्ञ केन्द्रों के साथ समन्वय भी किया जाता है।

वरिष्ठ कैंसर सर्जन डाॅ अजीत तिवारी ने जानकारी दी कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में कीमोथेरेपी, ओपन एवं दूरबीन विधि से कैंसर सर्जरी, ऑपरेशन के बाद गहन चिकित्सा, दर्द नियंत्रण, पोषण सहायता, फिजियोथेरेपी तथा नियमित फॉलो-अप की सुविधाएं उपलब्ध हैं। जटिल मामलों में कैंसर विशेषज्ञ, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ तथा पोषण विशेषज्ञ मिलकर मरीज की उपचार योजना तैयार करते हैं।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डाॅ निशांत सिन्हा ने बताया कि चयनित मरीजों में भोजन नली के कैंसर का ऑपरेशन दूरबीन विधि, अर्थात् मिनिमली इनवेसिव इसोफेगेक्टॉमी, से भी किया जाता है। इसमें छाती और पेट पर बड़े चीरे लगाने के बजाय छोटे छेदों के माध्यम से सर्जरी की जाती है। उचित मरीज के चयन और अनुभवी सर्जिकल टीम द्वारा किए जाने पर इस तकनीकn से ऑपरेशन के बाद दर्द, फेफड़ों से संबंधित जटिलताओं और अस्पताल में रहने की अवधि को कम करने तथा मरीज को शीघ्र सामान्य गतिविधियों में लौटने में सहायता मिल सकती है।

भोजन नली का कैंसर मुख्यतः दो प्रकार का होता है। स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का संबंध तम्बाकू, धूम्रपान, शराब, अत्यधिक गर्म भोजन या पेय पदार्थ तथा पोषण की कमी से हो सकता है। दूसरे प्रकार, एडेनोकार्सिनोमा, का संबंध लंबे समय से एसिड रिफ्लक्स, बैरेट इसोफेगस और मोटापे से हो सकता है। कई मरीजों में एक से अधिक जोखिम कारक एक साथ मौजूद रहते हैं।

डॉ. निशात सिन्हा ने कहा कि भोजन नली का कैंसर प्रारम्भिक अवस्था में प्रायः कोई स्पष्ट लक्षण उत्पन्न नहीं करता। इसलिए निगलने में लगातार कठिनाई, ठोस भोजन का अटकना, बार-बार भोजन वापस आना, बिना कारण वजन कम होना, छाती में दर्द या जलन, लगातार खांसी अथवा आवाज में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से निगलने में बढ़ती कठिनाई होने पर मरीज को शीघ्र विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और आवश्यकता होने पर अपर जीआई एंडोस्कोपी करानी चाहिए।

श्री महंत इन्दिरेश अस्प्ताल की वरिष्ठ गाइनी कैंसर सर्जन डाॅ यामिनी कंसल ने कहा कि किसी भी कैंसर की शीघ्र पहचान अत्यन्त महत्वपूर्ण है। प्रारम्भिक अवस्था में बीमारी का पता चलने पर पूर्ण उपचार और लंबे समय तक स्वस्थ रहने की सम्भावना अधिक होती है। ऐसे मरीजों को एंडोस्कोपिक उपचार, सर्जरी अथवा संयुक्त उपचार से दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। बीमारी के शरीर के अन्य अंगों तक फैल जाने के बाद उपचार अधिक जटिल हो जाता है और परिणाम अपेक्षाकृत कम अनुकूल होते हैं।

शोध के दौरान मरीजों की आयु, निवास स्थान, खान-पान, तम्बाकू एवं शराब का सेवन, अत्यधिक गर्म खाद्य या पेय पदार्थों की आदत, पोषण की स्थिति, पेशा, सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियां, पर्यावरणीय संपर्क, बीमारी की अवस्था, उपचार और दीर्घकालिक परिणामों का अध्ययन किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर अन्य चिकित्सा एवं शोध संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ भी सहयोग स्थापित किया जाएगा।

अस्पताल का उद्देश्य केवल मरीजों का उपचार करना नहीं है, बल्कि शोध के आधार पर भोजन नली के कैंसर की रोकथाम, उच्च जोखिम वाले लोगों की समय पर पहचान, जन-जागरूकता, उपयुक्त जांच और बचाव संबंधी दिशा-निर्देश तैयार करना भी है। यह शोध उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में कैंसर के वास्तविक कारणों और बदलते स्वरूप को समझने तथा भविष्य की कैंसर नियंत्रण नीति और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Share this

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *