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Saturday, February 24, 2024

देवभूमि उत्तराखंड अध्यात्म और योग की भूमि होने के साथ-साथ संस्कृति, साहित्य और कला की भूमि भी है – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने किया दो दिवसीय ‘हिमगिरी महोत्सव-2024″ का शुभारम्भ

देवभूमि उत्तराखंड अध्यात्म और योग की भूमि होने के साथ-साथ संस्कृति, साहित्य और कला की भूमि भी है – मुख्यमंत्री

श्रेष्ठ उत्तराखंड निर्माण के ’विकल्प रहित संकल्प’ को प्राप्त करने हेतु अपने प्रयास निरंतर जारी रखने होंगे: धामी

पर्वतीय सरोकारों के लिए समर्पित” हिमगिरि सोसाइटी” द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘हिमगिरी महोत्सव-2024″ का शुभारम्भ किया

देवभूमि उत्तराखंड अध्यात्म और योग की भूमि होने के साथ-साथ संस्कृति, साहित्य और कला की भूमि : धामी

सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूलमंत्र को ध्येय मानकर धामी सरकार आगे बढ़ रही हैं

मुख्यमंत्री ने सभी का आह्वान किया कि हमारे ये सभी प्रयास तभी सफल होंगे जब हम सब आपसी सहयोग से राज्य के विकास में अपना योगदान देंगे

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को बी.आर. अम्बेडकर स्टेडियम कौलागढ़ रोड देहरादून में ओएनजीसी एवं उत्तराखंड सरकार के सहयोग से पर्वतीय सरोकारों के लिए समर्पित” हिमगिरि सोसाइटी” द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘हिमगिरी महोत्सव-2024″ का शुभारम्भ किया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में डॉ॰ दिनेश कुमार असवाल, चित्रकला के क्षेत्र में प्रो. शेखर चंद्र जोशी तथा पर्यावरण के क्षेत्र में श्री सचिदानंद भारती को “हिमगिरि गौरव सम्मान-2024″ तथा हिमगिरि के संस्थापक सदस्य श्री दिनेश कुमार पांडे को तेल एवं गैस अन्वेषण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिये लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने हिमगिरि महोत्सव सांस्कृतिक समागम के भव्य आयोजन के लिये आयोजकों के साथ हिमगिरि सम्मान और लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित विभूतियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ओएनजीसी के सेवानिवृत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पंजीकृत हिमगिरी सामाजिक संस्था अपने समर्पण और सेवाओं के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्र की समृद्धि, संस्कृति और विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड अध्यात्म और योग की भूमि होने के साथ-साथ संस्कृति, साहित्य और कला की भूमि भी है। ऐसे आयोजन हमारी विलुप्त होती लोक विरासत को संरक्षण प्रदान कर आने वाली पीढ़ी को हमारी लोक संस्कृति से परिचित कराने तथा सामाजिक समरसता को प्रगाढ़ करने का कार्य करते हैं। इससे हमारे राज्य के कलाकारों को भी एक मंच उपलब्ध होता है और उनकी कला को प्रोत्साहन मिलता है। संगठन चाहे वह सामाजिक, साहित्यिक हो या सांस्कृतिक उसमें बड़ी शक्ति होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूलमंत्र को ध्येय मानकर हम आगे बढ़ रहे हैं। हमें भारत को पुनः विश्व गुरू के पद पर आरूढ़ करने के लिए हर परिस्थिति को पार करना है। भारत को विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए हर छोटी बड़ी कोशिश करनी है। श्रेष्ठ उत्तराखंड निर्माण के ’विकल्प रहित संकल्प’ को प्राप्त करने हेतु अपने प्रयास निरंतर जारी रखने होंगे। मुख्यमंत्री ने सभी का आह्वान किया कि हमारे ये सभी प्रयास तभी सफल होंगे जब हम सब आपसी सहयोग से राज्य के विकास में अपना योगदान देंगे।

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