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पहाड़ वही, चुनौतियां वही, लेकिन विकास की रफ्तार में धामी का उत्तराखंड आगे!

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पहाड़ वही, चुनौतियां वही, लेकिन विकास की रफ्तार में धामी का उत्तराखंड आगे!






 

 

दो पहाड़ी राज्य, चुनौतियां भी लगभग एक जैसी, लेकिन आर्थिक प्रदर्शन में उत्तराखंड ने हिमाचल प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है। केंद्र सरकार की स्वायत्तशासी संस्था अरुण जेटली राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान की ताजा रैंकिंग में उत्तराखंड ने देश के दस हिमालयी राज्यों में दूसरा स्थान हासिल किया है, जबकि हिमाचल प्रदेश छठे नंबर पर है। यह लगातार दूसरी बार है जब उत्तराखंड ने वित्तीय प्रबंधन में बेहतर प्रदर्शन का दम दिखाया है।

 

इस उपलब्धि को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के विकास और वित्तीय प्रबंधन पर फोकस के नजरिए से भी देखा जा रहा है। सीमित संसाधनों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों के बावजूद राज्य ने अपनी आमदनी बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।

 

अपनी कमाई बढ़ाने में उत्तराखंड नंबर वन

 

रिपोर्ट का सबसे अहम पहलू यह है कि अपने संसाधनों से राजस्व जुटाने के मामले में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में पहले स्थान पर है। वर्ष 2000-01 में राज्य का राजस्व महज 233 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 11,862.30 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। यानी राज्य ने अपनी आय के आधार को मजबूत करने में लंबा सफर तय किया है।

 

पर्यटन, खनन, जीएसटी और निवेश को बढ़ावा देने के प्रयासों के साथ 30 से अधिक नीतियों के सरलीकरण ने आर्थिक गतिविधियों के लिए नए रास्ते खोले हैं। सरकार का जोर विकास परियोजनाओं, निवेश और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर भी है।

 

वेतन, विकास और वित्तीय अनुशासन पर नजर

 

उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति की चर्चा में सरकारी कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा भी अहम है। राज्य में कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलने की स्थिति को प्रशासनिक स्थिरता के एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में देखा जाता है। इसके विपरीत हिमाचल प्रदेश में वेतन भुगतान को लेकर सामने आई वित्तीय चुनौतियों ने वहां की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, दोनों राज्यों में वेतन भुगतान की मौजूदा स्थिति की तुलना के लिए ताजा आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है।

 

चुनौती अभी बाकी, घाटा प्रबंधन में सुधार जरूरी

 

तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। घाटा प्रबंधन के मामले में उत्तराखंड पांचवें स्थान पर है। राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, पेंशन और कर्ज के ब्याज के भुगतान में खर्च होता है। ऐसे में आमदनी बढ़ाने के साथ खर्चों का बेहतर प्रबंधन करना भी जरूरी है।

 

निष्कर्ष: पहाड़ में विकास की नई तस्वीर

 

उत्तराखंड और हिमाचल दोनों पहाड़ी राज्य हैं, लेकिन वित्तीय प्रबंधन की इस रैंकिंग में उत्तराखंड का हिमाचल से आगे निकलना राज्य की आर्थिक दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। धामी सरकार के सामने अब इस बढ़त को बरकरार रखने, नए राजस्व स्रोत विकसित करने, निवेश बढ़ाने और विकास योजनाओं को गति देने की चुनौती है।

 

संदेश साफ है—उत्तराखंड अपनी कमाई बढ़ाने में आगे बढ़ रहा है। अब जरूरत है इस आर्थिक मजबूती को रोजगार, बुनियादी सुविधाओं और आम जनता के जीवन में दिखाई देने वाले विकास में लगातार बदलने की।

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By admin

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